जीरो माॅड्यूल रचनात्मक शिक्षण हेतु तैयार किया गया विशेष माॅड्यूल है। बाल्यावस्था के वे वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जब बच्चों में पढ़ने और स्कूल जाने की आदतों का निर्माण होता है। बाल्यावस्था की अच्छी देखभाल व अच्छे शैक्षिक रचनात्मक क्रियाकलाप बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करते हैं लेकिन बहुत से बच्चे, जिनका सरकारी स्कूलों में सीधे प्रवेश होता है, वे औपचारिक शिक्षा के कार्यक्रम के लिए तैयार नहीं होते हैं। जीरो माॅड्यूल एक से तीन माह तक के रचनात्मक क्रियाकलापों द्वारा बच्चों को नई कक्षा में जाने से पहले के सेतु पाठयक्रम के रूप में है।

कथा विश्वास करती है कि अर्थपूर्ण शिक्षा शुरू करने के लिए छात्रों को कक्षा में भयमुक्त और आरामदायक वातावरण मिलना चाहिए, इसलिए प्रत्येक सत्र में प्रारम्भ के 60 घंटांे को (जुलाई से) जीरो माॅड्यूल कहते हैं; जब बच्चे अपने परिवार, घर, वातावरण या पर्यावरण, कम्युनिटी आदि से आत्मविश्वास प्राप्त करते हंै, दूसरे की बातों को सुनते और बोलतें है और उसे कहानी के रूप में कहते हैं। ये तीन मुख्य चीजें ज्ञंजीं Katha pedagogy के अन्तर्गत हैं -पढ़ने और लिखने से पहले।

यह विशेष माॅड्यूल पहली कक्षा से लेकर पाॅंचवी कक्षा तक के बच्चों के बेसिक और प्री-स्कूल के पूर्व ज्ञान, विचार और कौशलों, भाषा तथा गणित के ज्ञान को आॅंकता है। 60 घंटे के ये माॅड्यूल बच्चों के संबंध में यह जानने में कि किन चीजों में उन्हें अधिक मजा आता है, जीवन में आगे जाने के लिए उनके क्या सपने हैं, अध्यापक की मदद करते हैं। इस माॅड्यूल के द्वारा पहली कक्षा से लेकर पाचॅंवी कक्षा तक के छात्र एवं छात्रायें पिछली चीजों को दोहराते हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास पैदा होता है और बच्चों एवं अध्यापकों के आपसी सम्बन्ध बढ़ते हैं और बच्चे स्कूल आने के लिए प्रत्यनशील होते हैं।